Kabir ke Dohe | संत कबीर के दोहे वो भी अर्थ सहित हिंदी में

famous kabir ke dohe in hindi

kabir das ji ke dohe aur unke arth कबीर प्रेम न चक्खिया,चक्खि न लिया साव। सूने घर का पाहुना, ज्यूं आया त्यूं जाव॥ झिरमिर- झिरमिर बरसिया, पाहन ऊपर मेंह। माटी गलि सैजल भई, पांहन बोही तेह॥ हरिया जांणे रूखड़ा, उस पाणी का नेह। सूका काठ न जानई, कबहूँ बरसा मेंह॥ kabir ke dohe रात गंवाई … Read more